
लक्ष्य तो था कि तुमको पा लूँ मैं पर पाया तुझको तो फिर तुझसे मैं मुक्त हुई फिर मैं लक्ष्य विहीन नहीं होना है मुक्त मुझे मैं तो हूँ तुझसे बंध कर खुश अलग अलग है अस्तित्व हमारा अलग अलग पहचान हमारी तुम तुम हो मैं मैं हूँ नहीं मैं और तुम एक तेरे पास रहूँ मैं पर तुझसे ही मुक्त रहूँ यही है बस प्यार हमारा होकर एक न होगा गुजारा...